Wednesday 11 July 2018


BIRTHDAY SPECIAL POEM FOR A FRIEND

वो एक नन्ही सी जान है ,
मुस्कराता चेहरा जिसकी पहचान है,
खुला उसके लिए सारा आशमां है ,
पंख खोल के उड़ना ,
उसका अरमान है ,
चिड़ियों सी फुदकती है ,
दाना दाना चुगती है ,
उसकी सुरीली चहचहाट से,
सारी महफ़िल सजती है,
फूल सी सदा मुस्कुराती है ,
सारा शमाँ महकाती है ,
जहां भी जाती है ,
वहीं बहार आती है ,
नन्ही सी वो त्रिंबडी है ,
इधर उधर भुनभुनाती है ,
मग़र फूलों को खिलाती है ,
शहद से मीठी उसकी वाणी है ,
वो लम्बी सी एक कहानी है ,
उसकी एक मुस्कान की कीमत ,
तारो से भी ज्यादा है ,
जब भी वो हॅस देती है,
जहाँ ये रंगीं हो जाता है
…..
…….

                                                  :--  वैभव शाक्य 
                                                                 (एक सुधा कृति)


HAPPY BIRTHDAY TRIMBDI



Saturday 7 July 2018




BIRTHDAY SPECIAL POEM FOR GYANU

सुना था नाम होता है ,
हर इंसान का उसके काम सा ,
यहाँ तो नामों निशां मिला ,
उसके नाम का,
ज्ञानू है उसका नाम,
ज्ञान से जिसका मीलो का वास्ता।
इसके दिमाग का भाव भी,
बाज़ार में लगेगा सस्ता,
क्या ये उसकी गलती है ,
या जहाँ से है उसका वास्ता(बिहार),
कोई काम अकेले कर नही सकता,
शादी करनी है पर,
घोड़ी चढ़ नही सकता,
उसे हमेशा यारों का साथ चाहिए,
सच कहूँ ग़र तो सब के पास ,
ज्ञानू सा एक दोस्त होना चाहिए,
थोड़ा भोला और सच्चा है,
पर दिमाग से थोड़ा कच्चा है,
या यूं कहो अभी तक बच्चा है,
वो जो भी है,जैसा भी है ,
मग़र अच्छा है .........

                                                   :--  वैभव शाक्य 
                                                                         (एक सुधा कृति)


HAPPY BIRTHDAY GYANU

Sunday 17 June 2018



HAPPY FATHER'S DAY


उनके दिए क़र्ज़ को अदा करना है ,
उनके प्रति हर फ़र्ज़ को पूरा करना है ,
उनके आशीर्वाद से ही सब होना है ,
वो ही है मुझे दुनिया दिखाने वाले ,
वो ही है जीना सिखाने वाले ,
कभी बयां नही किया उन्होंने दर्द मुझसे ,
मेरे हर दर्द ही दवा रखने वाले ,
एक दिन भी जीना उनके बग़ैर ,
ग़वारा नहीं मुझे,
वो ही हैं मुझे प्यार से बुलाने वाले,
ठंडी में कभी ठंड लगी,
गर्मी में गर्म ,
वो ही हैं प्यार की चादर से,
सब को सुलाने वाले ,
वो ही है मेरे चेहरे पर ,
हर मुस्कान की वज़ह ,
वो ही है गुदगुदा के हँसाने वाले ,
जो भी मैंने चाहा वो सब मिला मुझको,
वो ही हैं हर ख्वाहिश पूरी करने वाले,
साथ उनकी सदा परछाई चाहता हूँ,
रब से उनकी लंबी उम्र की फरियाद चाहता हूँ |


                                                                                  :--  वैभव शाक्य (एक सुधा कृति)



Tuesday 29 May 2018


खैरात-ए-इंसानियत 

ऐ सितारों जमीं पर उतर कर तो देखो ,
न जाने जमाने को क्या हो गया,
अब तो इंसान भी इंसा न रहा ,
कोई हिन्दू तो कोई मुसलमां हो गया,
खुदा ने इंसा को भाई भाई बनाया,
कोई सगा तो कोई ज़हर-ए-क़राबत हो गया,
एक दूसरे को मार के जीते है सब ,
कोई कातिल तो कोई दुश्मन-ए-दिल हो गया,
ऐ सितारों................................हो गया,
एक जमीं थी सब की सब मिलकर रहते थे ,
अब तो कही भारत तो कही पाकिस्तान हो गया ,
एक दूसरे की आँख भी मुनासिब नही इनको,
कोई क़ातिल-ए-बाबस्तगी ,
तो कोई दुश्मन नज़र हो गया,
अब तो रंगों में भी कोई ताल्लुक न रहा ,
लाल हिन्दू तो हरा मुसलमां हो गया ,
दे सकते हो कुछ गर ऐ सितारों,
बस फलक से ऊंचे खयालात देदे,
इस जहाँ के हर इंसान को ,
खैरात-ए-इंसानियत देदे ,
खैरात-ए-इंसानियत देदे |

                                           :-  `वैभव शाक्य (एक सुधा कृति)
                      
this poem is on demand by my dear grandfather
dedicated to him